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मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहे अधिकारी,टीबी विभाग के फर्जीवाड़े की जांच पर उठे सवाल, 4 महीने बाद भी जांच अधूरी,

टीबी विभाग के फर्जीवाड़े की जांच पर उठे सवाल, 4 महीने बाद भी अधूरी जांच,

जांच कमेटी पर ही खड़े हो रहे सवालिया निशान,

मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहे अधिकारी,

जशपुर 11 अगस्त 2026

जशपुर जिले में टीबी मरीजों के नाम पर हुए लाखों रुपये के फर्जीवाड़े की जांच अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। मामले की जांच के लिए प्रशासन द्वारा सात सदस्यीय जांच कमेटी गठित किए जाने के बावजूद करीब चार महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है जिसके बाद जांच कमेटी पर ही सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।आपको बता दें की जशपुर में टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण आहार सहायता राशि को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। आरोप है कि मरीजों के लिए निर्धारित राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए इसे अधिकारी ने अपने रिश्तेदारों के बीच बांट दिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी थी, लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई।अब सूचना के अधिकार के तहत जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मामले में नया खुलासा हुआ है। आरटीआई से सामने आई जानकारी के मुताबिक, जांच कमेटी ने अब तक अपनी जांच पूरी ही नहीं की है।चार महीने बीतने के बाद भी जांच लंबित रहने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर जांच कमेटी तय समय में अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं दे सकी? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है?

एक तरह तो प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में टीबी विभाग से जुड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच का महीनों तक अधूरा रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है ,बहरहाल 15 दिनों की समयसीमा में की जाने वाली जांच 4 महीने बीतने के बाद भी पूरी नहीं करने वाली जांच कमेटी को भंग कर नई जांच कमेटी गठित कर फिर से मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग स्थानीय लोग कर रहे हैं।

सीएमएचओ द्वारा गठित जांच कमेटी-

हरिओम द्विवेदी – डिप्टी कलेक्टर (अध्यक्ष)

डॉ कपिल देव कश्यप – सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक (सचिव)

डॉ आशुतोष तिर्की -खण्ड चिकित्सा अधिकारी (सदस्य)

राजीव रंजन मिश्रा – जिला कार्यक्रम प्रबंधक, एनएचएम (सदस्य)

योगेंद्र पाल सिंह- जिला लेखा प्रबंधक एनएचएम (सदस्य)

मनीषा कुजूर – बीईटीओ (सदस्य)

कुणाल गुप्ता -सचिविय सहायक (सदस्य)

क्या था पूरा मामला-

जशपुर जिले में टीबी मरीजों को सरकार की तरफ से हर महीने पोषण आहार के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह 6 महीने तक लगातार दिए जाते हैं ताकि टीबी मरीज हर महीने इन पैसों से पोषण आहार लें सकें लेकिन जशपुर टीबी विभाग में पदस्थ अधिकारियों ने इस राशि को मरीजों को ना देकर अपने रिश्तेदारों में रेवड़ी की तरह बांट दिया।

मीडिया को कुछ ऐसे अहम दस्तावेज मिले हैं जिनमे साफ देखा जा सकता है कि टीबी मरीजों को मिलने वाली पोषण आहार की राशि विभागीय अधिकारियों द्वारा उनके ही रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।जशपुर के मरीजों के नाम पर फर्जी तरीके से दिल्ली, रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और जांजगीर जैसे शहरों में रहने वाले लोगों के खातों में 6 -6 हजार की राशि ट्रांसफर कर लाखों रुपये रिश्तेदारों परिचितों में बांट दिये गये। जबकि वास्तविक टीबी मरीज इस लाभ से वंचित रह गए।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खेल

आरोप है कि जशपुर के टीबी विभाग में बिलासपुर जिले के मस्तूरी के एक अधिकारी कार्यरत हैं और इन्ही के द्वारा जशपुर जिले में काल्पनिक मरीज बनाकर फर्जीवाड़े के इस बड़े खेल को लंबे समय से खेला जा रहा है।2025 में 3 दर्जन से अधिक फर्जी टीबी मरीज बनाकर पोषण आहार की राशि का बन्दरबांट किया गया है जिनमें मरीज का पता जशपुर बताया गया है लेकिन इनके बैंक खाते दूसरे जिलों में है।फर्जी टीबी मरीज बनाकर बिलासपुर के मस्तूरी में लगभग 8 से ज्यादा अलग अलग खातों में पोषण आहार के पैसे ट्रांसफर किये गए हैं।

मरीजों के नाम और और फोन नम्बर भी फर्जी

जिन मरीजों के नाम पर यह फर्जीवाड़ा है उन लोगों से बात करने के लिए हमने जब सरकारी दस्तावेजों में अंकित किये गए फोन नम्बर पर संपर्क करना चाहा तो किसी भी फोन नम्बर पर बात नहीं हो पाई,ये सारे नम्बर फर्जी है।इस सूची की अगर बात की जाये तो सुमनलता कुर्रे, रिगेश कुमार निर्मलकर, मंगलीन निर्मलकर,राकेश कुमार अजगले, महादेव रात्रे, शंकर कुर्रे,महेश कुमार सुमन,राघव बसंत, सुनीता देवी जोगी,योगिता जोगी, राज खूंटे,महेंद्र जोगी,रितिक टंडन, हीरा राम सूर्यवंशी,जतिन डहरिया, शकुन बाई डहरिया, सहोद्रा बाई टंडन,नम्रता डहरिया, निकिता रात्रे,सुखबाई खंडेल समेत तीन दर्जन से अधिक ऐसे नाम है जिन्हें निवासी तो जशपुर जिले का दिखाया गया है लेकिन उनके बैंक खाते प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में हैं।

जिस टीबी मरीज की हो गई मौत उसके भी पैसे हुए मस्तूरी ट्रांसफर

इस सूची में पहला नाम प्रमिला खलखो का है जिसे सूची में कांसाबेल के अम्बाटोली का निवासी बताया गया है और इस मरीज की पोषण आहार की राशि 6 हजार रुपये मस्तूरी के नैमिश निरनेजाक के नाम पर ट्रांसफर की गई है इस महिला के रिश्तेदारों से जब हमने संपर्क किया तो उन्होंने बताया की वो गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के केमटेनवाटोली के रहने वाले हैं। महिला के रिश्तेदार नीरज टोप्पो ने बताया की उसकी नानी प्रमिला खलखो (57 वर्ष)को जनवरी 2025 में ईलाज के लिए जशपुर लेकर आये थे उनका चेकअप कराकर वो वापिस अपने गांव चले गए, और फिर कभी जशपुर अस्पताल नहीं आये।महिला प्रमिला खलखो की मौत दिसम्बर (2025 )में हो गई इस महिला के नाम पर भी फर्जी खाते में मई 2025 में 6 हजार रुपये ट्रांसफर किये गए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन लोगों पर पहले भी टीबी विभाग में फर्जीवाड़े के मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, वही लोग अब भी विभाग का संचालन कर रहे हैं, जिससे विभाग में कार्यरत लोगों के हौसले बुलंद है और विभाग में टीबी मरीजों के नाम पर बड़ा खेल खेला जा रहा है।मामले के सामने आने के बाद सीएमएचओ जी एस जात्रा ने जांच के लिए कमेटी गठित की थी और कमेटी को 15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन 4 महीने बीतने के बावजूद जांच कमेटी की जांच पूरी नहीं हो सकी है।मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाने वाले अधिकारियों पर भी अब स्थानीय लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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