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“भगवान शिव पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले सुन लें — सनातन को छेड़ा है, अब सनातनी तुझे छोड़ेगा नहीं”— प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

सवा लाख पार्थिव शिवलिंग पूजन के पावन अवसर पर 500 धर्मांतरित परिवारों की विधि-विधान से सनातन धर्म में घर वापसी

“भगवान शिव पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले सुन लें — सनातन को छेड़ा है, अब सनातन तुझे छोड़ेगा नहीं।”— प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा) 11 अगस्त 2026


माँ शबरी की पावन धरा और प्रभु श्रीराम की तपोभूमि शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवाधाम में आज सावन महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन के दिव्य अवसर पर 500 धर्मांतरित परिवारों की विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक संस्कारों के साथ उनके मूल सनातन परंपरा में सम्मानपूर्वक घर वापसी कराई गई।

यह पावन कार्यक्रम राम मिलेंगे आश्रम, कुमार दिलीप सिंह जूदेव सनातन फाउंडेशन एवं सेवा न्याय उत्थान के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस अवसर पर अखिल भारतीय घर वापसी अभियान प्रमुख एवं छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक संस्कारों के पश्चात धर्मांतरित परिवारों का पद प्रक्षालन कर उन्हें सनातन संस्कृति की मूल धारा से पुनः जोड़ा।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि “मेरे पूज्य पिताजी महाराज कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी ने जिस दृढ़ संकल्प, तपस्या और समर्पण के साथ घर वापसी अभियान का शुभारंभ किया था, उसे आगे बढ़ाना मेरे जीवन का संकल्प है। सनातन संस्कृति की रक्षा, धर्म जागरण और अपनी जड़ों से दूर हुए परिवारों को सम्मानपूर्वक अपनी मूल परंपरा से जोड़ने का यह पुण्य कार्य निरंतर जारी रहेगा।”

उन्होंने कहा “सनातन का अपमान करने वाले और हमारे आराध्य भगवान शिव पर अशोभनीय टिप्पणी करने वाले दुष्ट अरुण पन्नालाल यह समझ लें कि सनातन किसी को छेड़ता नहीं, लेकिन जब कोई सनातन की आस्था और संस्कृति को चुनौती देता है, तो सनातन उसे छोड़ता भी नहीं। अधर्म और सनातन विरोधी कृत्यों का परिणाम समय स्वयं दिखाता है। विष्णु का सुदर्शन चक्र जब चलता है, तो बड़े-बड़े अहंकार भी धराशायी हो जाते हैं।”

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और जीवन दर्शन है। अपनी जड़ों से जुड़ना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है और घर वापसी अभियान इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक सतत प्रयास है।

इस अवसर पर धर्माचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. अशोक हरिवंशी, श्रीमती अंजू गबेल, जगन्नाथ दादा, महात्यागी बाबा, शालिनी अत्री, ज्योति जायसवाल, श्यामता, भुवनेश्वरी साहू, माधुरी पांडे, शीलू साहू, लक्ष्मी पटेल, संतोषी साहू, दुर्गा बरेठ, पुष्पा साहू, पूर्णिमा गबेल, पुष्पा गबेल, परमेश्वरी सिदार, मीना साहू, अनीता कंवर, रोशनी राज, लक्ष्मी कंवर, नेम पटेल, धर्मसेना लिमिश जायसवाल, बृजेश जायसवाल, करण खुटे, नीतीश वैष्णव, राजेश कुमार साहू, उज्जैन सिंह कंवर, अनिल गबेल, सरिता दुबे, कुत्री जांगड़े, रूपेंद्र गबेल, अवधेश शुक्ला, भूपेंद्र सिंह, सुधाकर त्रिपाठी, विकास, ठाकुर श्रवण सिंह, महेश, अश्विनी, विष्णु, महेंद्र पाल, जानकी समेत हजारों लोग उपस्थित रहे।

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