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21 साल पुराने कुनकुरी चावल घोटाले में EOW ने पेश किया 40 हजार पन्नों का चालान,

21 साल पुराने कुनकुरी चावल घोटाले में 40 हजार पन्नों का चालान पेश

जशपुर 14 अगस्त 2026

जशपुर जिले के कुनकुरी में 21 साल पुराने चावल घोटाले में आखिरकार आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कोर्ट में अभियोग-पत्र दाखिल कर दिया है। मामले में करीब 40 हजार पन्नों का चालान पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है।दरअसल, वर्ष 2005 में शाखा कुनकुरी के गोदाम में चावल के स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 26,626 क्विंटल चावल की कमी दर्ज की गई थी। जांच के बाद वास्तविक कमी 22,198.52 क्विंटल चावल आंकी गई।जांच में इस पूरे मामले से शासन को करीब 2.50 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का उल्लेख सामने आया है।

आरोप है कि गोदाम प्रभारी और परिवहनकर्ता ने कथित तौर पर वास्तविक स्टॉक से अलग फर्जी दस्तावेज और अभिलेख तैयार किए और उन्हें वास्तविक बताकर इस्तेमाल किया। लंबे समय से चल रही जांच के बाद अब EOW ने कोर्ट में अभियोग-पत्र दाखिल कर दिया है।21 साल पुराने इस मामले में 40 हजार पन्नों का चालान दाखिल होने के बाद अब कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अभिलेखों में स्टॉक, लेकिन गोदाम में नहीं मिला चावल

मामले में सामने आया कि गोदाम में उपलब्ध वास्तविक चावल स्कंध और विभागीय पंजियों में दर्ज प्रविष्टियों के बीच गंभीर अंतर था। जांच के दौरान आरोप है कि वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार एवं संधारित किए गए तथा इनका असली अभिलेखों के तौर पर इस्तेमाल किया गया। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा खाद्य विभाग की संक्षेपिका के आधार पर कुनकुरी गोदाम में भंडारित चावल स्कंध की अनियमितता के संबंध में अपराध दर्ज करने के लिए EOW मुख्यालय रायपुर को पत्र भेजा गया था। इसके बाद प्रारंभिक निरीक्षण और स्टॉक सत्यापन किया गया।

2005 में दर्ज हुआ था अपराध

इस मामले में 30 सितंबर 2005 को सुनील कुमार निगम, तत्कालीन शाखा प्रबंधक एवं गोदाम प्रभारी, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम शाखा कुनकुरी और अन्य के खिलाफ अपराध क्रमांक 01/2005 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई थी।

दो अधिकारियों और परिवहनकर्ता की भूमिका सामने आई

जांच में पाया गया कि तत्कालीन गोदाम प्रभारी सुनील कुमार निगम और तत्कालीन गोदाम प्रभारी, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम, कुनकुरी शिव शंकर वैष्णव का गोदाम में भंडारित खाद्यान्न पर पदीय नियंत्रण था। जांच एजेंसी के अनुसार दोनों ने परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग के साथ आपसी सहमति और आपराधिक षड्यंत्र के तहत वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज तैयार या संधारित किए। हालांकि, जांच के दौरान शिव शंकर वैष्णव की मृत्यु हो चुकी है। वहीं परिवहनकर्ता विमल कुमार गर्ग की भूमिका 18 डिलीवरी ऑर्डरों के तहत 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन एवं कथित वितरण में प्रत्यक्ष रूप से सामने आई।

दो आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान

विस्तृत जांच के बाद सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग उर्फ बिल्लू निवासी खरसिया, जिला रायगढ़ के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने का दावा किया गया है। दोनों के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत लगभग 40,000 पृष्ठों का अभियोग-पत्र विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), जिला जशपुर में पेश किया गया है। 21 वर्ष पुराने इस मामले में अब इतने बड़े आकार के चालान के साथ न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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